उन दिनो कि याद भरी सायरी
क्या खूब लिखा है किसी ने
किसी जमाने मे हम भी जिया करते थे
ऊनके लिए
जो आज हमे पहचानने से इनकार करते है
करते है तो करने दो क्या हूवा.मेरे दोस्त
हम पिने के लिए ऊन्हे याद किया करते है।
वो सोचती हे कि जान छूटी चलो अच्छा हूवा
वो चैन कि निद सोया करती है
ओर हम पिने के बाद घोडे बेचकर सोया करते है।
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