Posts

Showing posts from November, 2021

उन दिनो कि याद भरी सायरी

  क्या खूब लिखा है किसी ने  किसी जमाने मे हम  भी जिया करते थे ऊनके लिए  जो आज हमे पहचानने से इनकार करते है करते है तो  करने दो क्या हूवा.मेरे दोस्त  हम पिने के लिए ऊन्हे याद किया करते है। वो सोचती हे कि जान छूटी चलो अच्छा हूवा  वो चैन कि निद सोया करती है ओर हम पिने के बाद घोडे बेचकर सोया करते है।